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छत्तीसगढ़

संत के ब्रह्मचर्य आश्रम में अनुयायियों को साधने की कोशिश

राजिम । सत्ता चाहे कांग्रेस की रही हो या भाजपा की एक समय ऐसा भी था जब सत्ता के गलियारो में छत्तीसगढ़ के गांधी के रूप मे चर्चित सुविख्यात भगवताचार्य ब्रह्मलीन संत कवि पवन दीवान की तूती बोलती थी, राजिम स्थित उनके ब्रह्मचर्य आश्रम में उनसे मुलाकात के लिए एडी -चोटी की मशक्कत करनी पडती थी। घंटों बाट जोहना पड़ता था ।उन्होंने अपनी दबंग सिफारिशों से राजनीति में अनेक नेता पैदा किये, अपनी संसदीय कार्यकाल के दौरान कईयों को विधानसभा के टिकट दिलवा छत्तीसगढ़ की राजनीति में स्थापित किए जो आज भी सत्ता संगठन के अहम ओहदो पर विराजमान है। विभिन्न चुनावों में स्टार प्रचारक के रूप में उन्होंने अपने ओजस्वी भाषण शैली के माध्यम से अनेक नेताओं की डूबती नैय्या पार लगाने में महती भूमिका निभाने वाले संत दीवान को अपने क्षेत्र की चुनावी सभाओ में ले जाने के लिए नेताओं में होड मची रहती थी।
लेकिन संत पवन दीवान के समाधिलीन होते ही नेताओं का ब्रह्मचर्य आश्रम के प्रति नजरिया ही बदल गया। आज संतश्री जी को समाधिलीन हुये लगभग आठ वर्ष हो गये। इस बीच उनकी कई प्राकट्य दिवस और पुण्य तिथियां निकल गई। कांग्रेस भाजपा के कई राजनेता मंत्री आये गये पर किसी ने ब्रह्मचर्य आश्रम पहुंच उनकी समाधि पर श्रद्धा सुमन के दो पुष्प अर्पित करना तो दूर आश्रम की ओर झांकना भी मुनासिब नही समझा। 60 – 70 के दशक के मई -जून की भरी तपती दोपहरी में छत्तीसगढ़ की गली – कूचो महज पाटा पहने पैदल घूम -घूम कर “पृथक छत्तीसगढ़ राज आन्दोलन की अलख जगाने वाले छत्तीसगढ़ महतारी के इस भागीरथी ,लाडले सपूत की स्वर्णिम स्मृतियों को इतनी आसानी से भुला जायेगा इसकी कल्पना शायद किसी ने भी नही की थी।ऐसे छत्तीसगढ़ कांग्रेस की राजनीति में एक मजबूत स्तंभ के रूप में स्थापित हो चुके कद्दावर आदिवासी नेता, कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम ने अपने राजिम माघी पुन्नी मेला के राजिम प्रवास के दौरान अचानक बिना किसी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के संत पवन दीवान की समाधि में पहुंच श्रद्धा सुमन कर सब को चौका दिया।मरकाम ने भले ही यह अपनी सहजता व सहृदयता के चलते किया हो लेकिन सियासी गलियारे में हलचल मची हुई हैं सियासी पण्डित व लोग अपने अपने हिसाब से अटकले लगा रहे है यह बात किसी से छिपी नही है कि संत पवन दीवान ने अपनी भगवत कथाओं और साहित्यिक गतिविधियों के माध्यम से समूचे छत्तीसगढ़ अंचल में अपने पीछे वर्ग जाति बंधन से मुक्त अनुयायियों का एक भारी भरकम हूजूम छोड गये है। खास कर कवर्धा, राजनांदगांव, दुर्ग, बालोद, धमतरी , महासमुंद, गरियाबंद, रायपुर, बलौदाबाजार,कांकेर, बिलासपुर, मुंगेली, बेमेतरा कोरबा जांजगीर चांपा आदि जिलो के जनमानस से अपने कथा प्रवचनो के माध्यम से निरंतर संबद्ध रहे ।ऐसे में ठीक मिशन 2023 के कुछ महिने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के ब्रह्मचर्य आश्रम में आगमन को लेकर राजनीति के जानकारों का मानना है कि ब्रह्मचर्य आश्रम में पीसीसी चीफ मरकाम की आमद एक सधी हई रणनीति का हिस्सा हो सकता हैं संभवत: वे अपनी आमद के माध्यम से समूचे छत्तीसगढ़ अंचल में फैले हुये संत -कवि दीवान के अनुयायियों, ब्रह्मचर्य आश्रम से धार्मिक अनुष्ठानों, कर्मकाण्डों में परांगत हो हजारों की तादात में निकले पंडितों के साथ मौजूदा समय में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय व स्थापित संत दीवान से शिष्य के रूप में संबद्ध रहे भगवताचार्यो और कथाकारो के एक बड़े वर्ग को साधने की कोशिशो के बीच संत समर्थकों को यह संदेश देने में पूरी तरह सफल रहे कि सत्ता के चकाचौंधों ,से परे आज भी छत्तीसगढ़ महतारी के इस लाडले माटी- पुत्र के कृतित्व और स्मृतियों की सुध लेने वाला भी कोई हैं ।
बहरहाल सियासी पंडितो के अनुमानों, दावों की पुष्टि तो आने वाला समय ही करेगा।लेकिन यह फौरी तौर पर कहा जा सकता हैं यदि मरकाम अपने अघोषित मिशन “ब्रह्मचर्य आश्रम ” में सफल होते हैं तो यह उनके सियासी सफर की अहम उपलब्धि होने के साथ ही प्रदेश के आसन्न विधानसभाई चुनावों में दूरगामी परिणाम देने वाला भी साबित हो सकता है।

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