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छत्तीसगढ़

अंतरजातीय विवाह के प्रोत्साहन राशि में फर्जीवाड़े का खुलासा

राजिम । विकासखंड फिंगेश्वर के ग्राम पंचायत सिर्री कला के आश्रित ग्राम पोलकर्रा में अंतरजातीय विवाह की प्रोत्साहन राशि को लेकर तलाक हो चुके दंपति ने फर्जी गवाह प्रस्तुत कर बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया हैं। पति-पत्नी ने तलाक हो जाने के बावजूद शासन द्वारा संचालित योजना के दूसरे किस्त की राशि हड़पने के लिए विभाग में पति-पत्नी की ही तरह साथ में रहने की जानकारी व फर्जी गवाह प्रस्तुत कर योजना के राशि का बंदरबांट किया हैं। इस तलाकशुदा पति-पत्नी के अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन राशि के दूसरी किस्त के आहरण में क्षेत्र की जिला पंचायत सभापति का भी नाम सामने आया हैं। जबकि जिला पंचायत सभापति उन दोनों की तलाक होने की उन्हें जानकारी नहीं होने की बात कह रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार फिंगेस्वर ब्लॉक के ग्राम पंचायत सिर्री कला के आश्रित ग्राम पोलकर्रा में मोहित देवदास व पदमनी विश्वकर्मा 4 जून 2018 को प्रेम विवाह किया। जो विवाह बंधन में बंधने के बाद शासन द्वारा संचालित अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन राशि के लिए कार्यालय सहायक आयुक्त आदिवासी विकास के जिला मुख्यालय गरियाबंद में 27 फरवरी 2019 को आवेदन सहित अन्य प्रक्रिया पूरा किया गया। जिसके बाद पहला किश्त 25 अक्टूबर 2019 को 1 लाख रुपये विभाग द्वारा जारी किया गया। वही कुछ साल बितने के बाद प्रेम विवाह किए दंपति में से महिला ने गांव के किसी दूसरे युवक के साथ जाकर शादी कर लिए और दोनों साथ रहने लगे। इस दौरान अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन राशि की दूसरी किस्त के लिए इन दोनों तलाकशुदा पति-पत्नी को जानकारी मिलती हैं। जिस पर इन दोनों द्वारा राशि को निकालने के लिए प्रयास तो किया गया लेकिन दोनों का तलाक हो जाने के कारण गवाह प्रस्तुत करने में सफल नही पाए। फिर दोनों तलाकशुदा पति-पत्नी ने शासकीय राशि को हड़पने के उद्देश्य से दोनों ने मिलकर अन्य गांवों के लोगों को गवाह बनाकर फर्जी तरीके से 25 अक्टूबर 2022 में 1 लाख 50 हजार की राशि फर्जी तरीके से आहरण कर लिया गया। जबकि इन दोनों का 25 मई 2021 को फिंगेश्वर में एक नोटरी के पास से विवाह विच्छेद कर लिया गया था। जब इस फर्जीवाड़े का पड़ताल किया तो महिला के पहले पति ने राशि आहरण के लिए अपनी तलाक दे चुके पत्नी को दूसरी किस्त की राशि आहरण के संबंध में चर्चा किया। जिस पर उसकी तलाकशुदा पत्नी भी मान गई। लेकिन तलाक हो जाने के कारण दोनों दूसरे किस्त के राशि आहरण में काफी परेशानी हुई। इस बीच इन दोनों की अंतरजातीय विवाह की प्रोत्साहन राशि की दूसरी किस्त की जानकारी क्षेत्र की जिला पंचायत सदस्य मधुबाला को दिया गया तो उन्होंने दोनों को साथ लेकर विभाग से बात कर दूसरे किस्त की राशि दिलवाया गया। वही उन दोनों पति-पत्नी द्वारा बाहर गांवों से गवाह तैयार कर दूसरी किस्त की राशि फर्जी तरीके से आहरण कर सभी ने मिलकर राशि को बांट लिए जाने की जानकारी मिली हैं। विभाग से पता किया गया तो गवाह में बनसिंह सोरी, नवतु राम नेताम, बैशाखू राम सोरी, नरेंद्र देवदास का नाम हैं। तीनों का निवास स्थान पता नहीं चल पाया हैं। जिसकी पुष्टि सरपंच प्रतिनिधि मोहन साहू ने किया हैं। नियमानुसार संबंधित विभाग को भौतिक सत्यापन के बाद दूसरी किस्त की राशि देनी थी पर विभाग के अधिकारी और कर्मचारी के साथ साठगाठ होने के कारण भौतिक सत्यापन करना मुनासिब नहीं समझा और इस प्रकार लगभग डेढ़ लाख रुपय की फर्जीवाड़ा को अंजाम दिया गया है।
इस संबंध में जिला पंचायत सभापति मधुबाला रात्रे ने बताया कि यह पति पत्नी अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन राशि की दूसरे किस्त मिलने में परेशानी होने का हवाला देकर मेरे पास आये थे। जिस पर मैंने उन दोनों का सहयोग किया। मुझे नहीं पता थी कि उन दोनों का तलाक हो चुकी हैं। अगर तलाक के बावजूद दोनों इस योजना का लाभ लिए है तो उन दोनों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
इस संबंध में आदिवासी विकास विभाग के आयुक्त अनुपम आशीष टोप्पो ने कहा कि इस मामले की जानकारी लेने के बाद ही कुछ बता सकता हूं।

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