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छत्तीसगढ़

सिकलसेल से ग्रसित बच्चों को ब्लड के लिए बहाना पड़ रहा पसीना

पत्थलगांव । सिविल हॉस्पिटल में हमेंशा सुविधाओ का आभाव रहा है,यही कारण है कि गंभीर बिमारी से ग्रसित मरीजो को यहा पहुंचते ही सुविधा वाली जगहो मे रिफर कर दिया जाता है। इन दिनो सिविल हॉस्पिटल मे ब्लड बैंक की कमी के कारण सिकलसेल से ग्रसित बच्चे सबसे अधिक परेशान है,उन्हे डोनर का ब्लड ना मिलने के कारण जिले का मदरबोर्ड पर आश्रित रहना पड रहा है,जहा से अनेक बार बच्चो के अभिभावको को ब्लड की सुविधा उपलब्ध नही हो पाती। दरअसल यहा के सिविल हॉस्पिटल मे लंबे समय से ब्लड बैंक की मांग की जा रही है,सुबे के मुखिया ने जरूरत को देखते हुये सिविल हॉस्पिटल को ब्लड बैंक दिया भी है,मगर शासकीय कार्यो मे रहने वाली लापरवाही के कारण लंबा समय बितने के बाद भी सिविल हॉस्पिटल का ब्लड बैंक तैयार नही हो सका,जिसका खामियाजा सिकलसेल जैसी गंभीर बिमारी के मरीजो को उठाना पड रहा है। दिन शुक्रवार को एक 2 साल की बच्ची के साथ कुछ भी अनहोनी हो सकती थी,उसके शरीर मे मातर्् 4 ग्राम ब्लड ही शेष रह गया था,बच्ची के अभिभावक मोहन यादव ग्राम तमता ने बताया कि पहले यहा के सिविल हॉस्पिटल मे सिकलसेल से ग्रसित मरीज को स्वयं से लाये गये डोनर का ब्लड लेकर उसे रिफाईन करके मरीज को चढा दिया जाता था,परंतु अब यह सुविधा यहा पूरी तरह बंद कर दी गयी है,जिसके कारण क्षेत्र के मरीजो को काफी समस्या उठानी पड रही है। उनका कहना था कि आपात स्थिती मे सिकलसेल के मरीजो को जशपुर के ब्लड बैंक मे जाकर ब्लड लेना पडता है,परंतु वहा भी अधिकांश बार जरूरत के ब्लड की कमी हो जाती है,जिसके कारण अधिकांश बार मरीज को काफी गंभीर परिस्थिती का सामना करना पडता है। उनका कहना था कि सिविल हॉस्पिटल मे बनने वाला ब्लड बैंक जल्द ही निर्मित कर दिया जाता तो गंभीर बिमारी के मरीजो को 110 किलोमीटर का सफर तय कर ब्लड लेने की परेशानी से मुक्ति मिल जाती।।
ब्लड बैंक का हो रहा निर्माण-ब्लड बैंक की कमी के संबंध मे जब ब्लाक चिकित्सा अधिकारी डॉ जेम्स मिंज से बात की गयी तो उनका कहना था कि ब्लड बैंक तैयार करने की प्रकिया जारी है,जल्द ही सिविल हॉस्पिटल मे ब्लड बैंक की सुविधा उपलब्ध हो जायेगी। उन्होने बताया कि वर्तमान मे ब्लाक के अंदर 419 सिकलसेल के मरीज है,जिसमे से सिकलीन एवं थाईलिसियना के लगभग 20 से 25 मरीज है,जिन्हे हर महिने ब्लड की आवश्यकता होती है। उन्होने बताया कि 375 मरीजो मे 50 प्रतिशत से अधिक ब्लड रहने के कारण उन्हे दवाईयों से ठीक कर दिया जाता है। उनका कहना था कि सी.एम फंड मिलने के बाद आर.ई.एस विभाग द्वारा ब्लड बैंक बनाने की प्रकिया शुरू की जा चुकी है।।
जिला कलेक्टर ने शुरू की पहल-:जिले के स्वास्थ्य केन्द्रो मे लगने वाले ब्लड की आपूर्ति को देखते हुये जिला कलेक्टर डॉ रवि मित्तल ने इन दिनो जिले के आठो ब्लाक मे ब्लड डोनेशन कैंप की शुरूवात की है। पिछले कुछ दिनो पूर्व यहा के ठाकुर शोभा सिंह महाविद्यालय मे भी ब्लड डोनेशन कैंप लगाया गया था,उसके अलावा 11 अक्टूबर को सिविल हॉस्पिटल मे पुन: ब्लड डोनेट कैंप का आयोजन किया गया है। ब्लाक चिकित्सा अधिकारी डॉ जेम्स मिंज ने बताया कि ब्लड डोनेट कैंप कांसाबेल, फरसाबहार,कुनकुरी के अलावा लगभग सभी ब्लाको मे लगाया जा रहा है,जिसमे अधिक से अधिक ब्लड इकटठा कर उसे मदरबोर्ड मे जमा कर सके,जिससे जरूरतमंद को समय पर ब्लड उपलब्ध कराया जा सके।।
–ब्लड बैंक बनाने की शुरूवात हो चुकी है,सिकलसेल के मरीजो को जशपुर मदरबोर्ड से ब्लड उपलब्ध कराया जा रहा है।
डॉ.जेम्स मिंज-ब्लाक चिकित्सा अधिकारी-पत्थलगांव

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