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छत्तीसगढ़

१० साल बाद देवभोग लौटे गुरु का सम्मान करने शिष्यों ने तीन घंटा किया इंतजार

देवभोग । गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वरा, गुरु साक्षात परम ब्रह्मा तस्मै गुरुवे नम:, इस दोहे में गुरु की महिमा को मण्डित किया गया है, कि गुरु अगर मिल जाय, तो जीवन में भगवान को पाना आसान हो जाता है और गुरू के रुप में साक्षात ईश्वर की प्राप्ति हो जाती है। गुरु को ईश्वर के रूप में मानने का एक ऐसा तस्वीर नगर में सोमवार को देखने को मिला। ज़ब कुछ शिष्य अपने गुरु से मिलने के लिए उपहार लिए घंटों इंतज़ार करते दिखे। दरअसल रायपुर निवासी मनोज कुमार जांगड़े वर्ष 2009 से लेकर 2012 तक देवभोग ब्लॉक के झाखरपारा में शासकीय हाईस्कूल में राजनीति शास्त्र के शिक्षक के रूप में पदस्थ थे। इस दौरान 2012 में उनका स्थानांतरण रायपुर हो गया। स्थानांतरण के दौरान विद्यार्थीयों ने नम आँखों से जांगड़े को विदाई दिया था। रायपुर लौटने के बाद अपनी पुरानी यादों को ताज़ा करने के लिए मनोज जांगड़े और उनके साथी शिक्षक नरोत्तम चतुर्वेदी 10 साल बाद देवभोग घूमने आये थे। देवभोग में वे पुराने साथी शिक्षकों से भेंट मुलाक़ात कर रहे थे, इस दौरान जैसे ही छात्रों को पता चला कि उनके शिक्षक देवभोग पहुँचे है। तो बिना देर किये आसपास के पांच से छह गॉव के छात्रों ने आपस में बातचीत कर गुरूजी से मिलकर पुरानी यादों को ताज़ा करने का मन बना लिया। सभी सुबह 10 बजे देवभोग पहुँच गए। इस दौरान उन्हें पता चला कि गुरूजी झाखरपारा स्कूल गए हुए है और उन्हें लौटने में देर भी हो सकता है। घर से बिना भोजन किये पहुँचे छात्रों ने नास्ता कर गुरूजी का इंतज़ार किया। सभी हाथ में उपहार लिए गुरूजी से मिलने को बेचैन थे। अंतत: गुरूजी ज़ब तीन घंटे बाद लौटे तो सभी ने उनका पैर छूकर आशीर्वाद लिया। और घंटे भर बातचीत कर पुरानी यादों को ताज़ा किया। वहीं बच्चों का इतने सालों के बाद स्नेह देखकर गुरूजी के आँख से आंसू छलक गए। और उन्होंने सभी बच्चों को गले लगा लिया।
राजधानी में हर परिस्थिति में खड़े रहते है गुरुजी: गुरूजी से मिलने पहुँचे जबरसिंग सोनवानी, भूषण कुमार निधि, गिरधारी बिसी, उपेंद्र बिसी, नरेंद्र बिसी, गुणसागर पात्र और घासीराम पात्र ने बताया कि वे ज़ब भी रायपुर जाते है, और उनका कोई काम राजधानी में पड़ता है, इस दौरान वे जैसे ही जांगड़े सर को फ़ोन करते है। सर तुरंत वहां पहुँच जाते है। छात्र जिस काम के लिए रायपुर जाते है। उनका काम करवाकर उन्हें भोजन करवाकर जांगड़े सर उन्हें बस स्टैंड तक छोडऩे भी आते है। छात्रों के मुताबिक किसी का भी बर्थडे हो या अन्य कार्यक्रम। जांगड़े सर कभी किसी को बधाई देना भी नहीं भूलते। छात्रों के मुताबिक जीवन में आज भी कभी भी कोई परेशानी होती है, तो जांगड़े सर सलाह देकर उस परेशानी को दूर करने का रास्ता भी दिखाते है।

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