छत्तीसगढ़

अगहन माह के पहले गुरूवार पर माता लक्ष्मी की हुई पूजा

दंतेवाड़ा । धन वैभव की देवी मां लक्ष्मी की आराधना का पर्व अगहन गुरूवारी के पहले गुरूवार पर 30 नवंबर को माताओं ने मां लक्ष्मी जी का व्रत रखकर ब्रम्ह मुहूर्त में मां लक्ष्मी की विधि विधान से पूजा अर्चना कर माता से परिवार की सुख समृद्धि की कामना की।
ज्ञात हो कि 28 नवंबर 2023 से अगहन मास की शुरूआत हो चुका है। अगहन माह का पहला गुरूवार 30 नवंबर को था। पहले अगहन गुरूवारी पर प्रत्येक घरों में माता लक्ष्मी की विशेष पूजा हुई। मां के आराधना का विशेष दिन होने से आज सुबह सुबह लोगों के घरों के पट खुले हुए दिखे। घर घर में माता लक्ष्मी के चांवल आटे से चरण चिन्ह बनाकर अक्षत रोली छिड़ककर आंगन में दीप जलाकर विधि विधान महालक्ष्मी जी का व्रत पूजन किया गया। अगहन माह में इस बार 4 गुरूवार पड़ रहे हैं। मान्यता है कि अगहन गुरूवार माह के प्रत्येक गुरूवार को माता लक्ष्मी की पूजा करने से माता प्रसन्न होती है। धन वैभव की प्राप्ति होती है मानव के सभी दुख ताप, कष्ट दूर होते हैं। प्रत्येक गुरूवार को अलग अलग प्रकार के पकवान के भोग चढ़ाने पर मां प्रसन्न होती है और भक्तों को आर्शीवाद प्रदान करती है। यही कारण है कि महिलायें अगहन माह पर प्रत्येक गुरूवार को मां लक्ष्मी की पूजा अर्चना पूरे श्रद्धाभाव के साथ करती हैं। शनि मंदिर के पंडित विभूति भूषण ने बताया कि अगहन वृहस्पित में मां लक्ष्मी की आराधना पूर्ण फलदायी होता है। पूरे भक्तिभाव से व्रत करने पर जातकों को अक्षय सुखों की प्राप्ति होती है। उपासक सूर्योदय से पहले ही माता की पूजा करते हैं। एक दिन पूर्व ही घरों की साफ सफाई कर ली जाती है। पौराणिक मान्यतानुसार अगहन के गुरूवार को माता लक्ष्मी सुबह सुबह विचरण करती हैं और जिस घर के पट खुले दिखते हैं साफ सफाई होती है उनके चरण पादुका बने होते हैं आंगन में दीये जल रहे होते हैं उन घरों में माता लक्ष्मी प्रवेश करती हैं और भक्तों को आर्शीवाद देती हैं। सर्व विदित है कि धन वैभव की देवी मां लक्ष्मी स्वच्छता की प्रतीक हैं। मां लक्ष्मी उस घर में ही प्रवेश करती हैं जिस घर में शुद्धता व स्वच्छता बनी रहती है उस घर में ही माता का वास होता है। बस्तर अंचल में अगहन गुरूवारी पर्व को हर्षोल्लस व पारंपरिक रूप से मनाये जाने की परंपरा है।

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