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छत्तीसगढ़

त्रिवेणी संगम में चारों और दिख रही गंदगी

राजिम ।  छत्तीसगढ़ का प्रयाग त्रिवेणी संगम नदी की हालत इन दिनों बद से बदतर हो गई है। पानी तक जाने के लिए पूरे पैर कीचड़ से सन जाता है। यहां पर विसर्जित की जाने वाली सामग्री के अलावा कपड़े, खाद्य पदार्थ के रेपर इत्यादि अनेक ऐसे सामग्री है जिसके कारण नदी का अस्तित्व दांव पर लग गया है। नदी में पानी कम होने के बाद इनकी असलियत अब दिख रही है। गंदे पानी पर लोग स्नान करने के लिए विवस है। बता देना जरूरी है कि गत दिनों भेंटवार्ता कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल राजिम पहुंचे थे उन्होंने रात्रि विश्राम भी किया और सुबह 11:30 देवभोग के लिए निकल पड़े। इस दौरान 10:30 बजे पत्रकार वार्ता लिया। इसमें एक पत्रकार ने खड़े होकर पूछ लिया कि नदी का अस्तित्व खतरे में है नदी प्रदूषण से लबरेज है। इनकी साफ सफाई बहुत जरूरी है। परंतु इस दिशा में मुख्यमंत्री की सकारात्मक जवाब नहीं आई अलबत्ता लाखों लोगों की श्रद्धा का केंद्र त्रिवेणी संगम लगातार गंदगी एवं प्रदूषण की भेंट चढ़ रही है। जानकारी के मुताबिक संगम नदी को लेकर अभनपुर के विधायक एवं पूर्व मंत्री धनेंद्र साहू विधानसभा में अपनी बात भी रख चुके हैं। लेकिन नदी की स्थिति दिनोंदिन खराब होती जा रही है जिस पर चिंतन करना बहुत जरूरी है। उल्लेखनीय है कि 5 फरवरी से माघी पुन्नी मेला है। इसकी तैयारी में सड़क बनाने का काम चालू होते हुए नजर आ रही थी। अजय उजाला की टीम ने शाम 4:00 बजे जैसे ही नदी तट पर पहुंचे श्रद्धालुओं की अपार भीड़ देखने को मिली। लोग अपने परिवार सहित लक्ष्मण झूला का उपयोग कर सीधे महाकाल बाबा कुलेश्वर नाथ के दर्शन करने के लिए जा रहे थे। कुछ श्रद्धालु संगम के पानी छिड़कने के लिए जैसे ही नदी में गए, पानी तक पहुंचने में उनके पूरे पैर कीचड़ से सराबोर हो गया। गंदगी तथा कीचड़ नदी की पवित्रता पर चोट करने का काम कर रही है। यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या कम हो सकती है। बताया गया कि मुख्य रूप से यहां 5 घाट है जिनमें प्रमुख रूप से सोन तीर्थ घाट, गंगा आरती घाट, अटल घाट, नेहरू घाट, बेलाही घाट। इनमें से नेहरू घाट और बेलाही घाट नवापारा अर्थात रायपुर जिला में है। बाकी तीनों घाट गरियाबंद जिला अर्थात राजिम की ओर है। प्रतिदिन अस्थि विसर्जन, मुंडन संस्कार, स्नान, दान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते रहते हैं। जिस तरह से श्रद्धालु श्रद्धा का केंद्र मानकर उपस्थित हो रहे हैं इस आधार पर प्रतिदिन नदी घाट की सफाई होनी चाहिए। स्थानीय प्रशासन को इस दिशा में ध्यान देना चाहिए लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो रहा है नतीजा श्रद्धालुओं के द्वारा छोड़ी गई विसर्जन सामग्री, कपड़े इत्यादि नदी में ही पड़े रहते हैं जो प्रदूषित करने का काम कर रही है। नदी में सिल्क की उपस्थिति दिनों दिन बढ़ रही है। अभी तक इस दिशा में किसी ने ध्यान नहीं दिया है क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से लेकर विभागीय अधिकारी मौन है। त्रिवेणी संगम की सफाई करने के लिए राजिम और नवापारा दोनों पालिका को आगे आने की जरूरत है। तभी नदी की पवित्रता बनी रहेगी। यहां आने के बाद दृश्य देखने के पश्चात श्रद्धालु जब वापस जा रहे हैं तो उनके नजर में संगम की पवित्रता किस तरह से बैठ रही है इस पर विचार करना जरूरी है। लोग नदी को पवित्रता की प्रतिमूर्ति मानते हैं लोगों ने बताया कि आज से दो दशक भर पहले नदी बहुत साफ-सुथरी थी लेकिन वर्तमान में दिनों दिन प्रदूषित हो जा रही है। दूसरी ओर नदी को स्वच्छ रखने के लिए जगह-जगह बोर्ड लगा देना चाहिए तथा उसमें स्वच्छता के नारे लिखे होने चाहिए। हमने कुछ लोगों से बात किया उन्होंने स्पष्ट कहा कि नदी को बचाना पहली प्राथमिकता स्थानीय प्रशासन की होनी चाहिए उसके बाद कोई ध्यान दे या ना दे। स्थानीय लोगों को फिक्र करना जरूरी है।
कुछ दिन पहले स्वयंसेवी संस्थाओं ने नदी की सफाई का बीड़ा उठाया था वर्तमान में उनकी उपस्थिति नहीं हो रही है यह भी चर्चा का विषय बन गया है।

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