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खेल – मनोरंजन

जमीनी स्तर की खेल प्रतिभाओं को मिला उचित मंच

खेलो इंडिया कार्यक्रम का छठवां संस्करण 19 से 31 जनवरी तक तमिलनाडु में

जसवंत क्लाडियस,तरुण छत्तीसगढ़ संवाददाता
15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भारत के खिलाडिय़ों ने विश्व खेल मंच पर अपना प्रदर्शन जारी रखा लेकिन पदकों की दौड़ में शामिल नहीं हो सके। ओलंपिक खेल और विश्व चैंपियनशिप के साथ महाद्वीपीय स्पर्धा में हमारे खिलाड़ी 20वीं सदी में कुछ को छोड़कर असफल होते रहे। खिलाडिय़ों की असफलता के लिए प्रत्येक ओलंपिक खेल, एशियाई खेल, विश्व स्पर्धा के पश्चात एक समिति का गठन किया जाता था। जांच समिति अपनी रिपोर्ट को केंद्र सरकार को सौंप देती थी। इसके पश्चात केंद्र सरकार, भारत का खेलकूद मंत्रालय, इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन उस जांच रिपोर्ट का क्या करता था यह आज तक रहस्य बना हुआ है लेकिन यह स्पष्ट है कि जांच रिपोर्ट से खिलाडिय़ों के अगले प्रदर्शन पर भी कोई फर्क नहीं पड़ता था। याने ना तो प्रतिभागियों को अपने खेल को सुधारने की चिंता थी ना ही खेल संगठनों को अच्छे परिणाम के लिए कुछ उपाय निकालने की समझबूझ थी। 21वीं सदी के पहले भारत में खेलकूद की स्थिति अच्छी नहीं थी। 2014 में सत्ता परिवर्तन के पश्चात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत में खेलकूद की गिरती साख पर विशेष ध्यान देना आरंभ किया। उन्होंने खेल विभाग को 2004 एथेंस के रजत पदक विजेता राज्यवद्र्धन सिंह के हाथों सौंप दिया। ओलंपियन राठौर ने भारत के खेल अधिकारियों, खेल संगठनों, खेल को लोकप्रिय बनाने का दम भरने वाली संस्थानों से मिलकर नई नीति बनाई। इस नीति को 1917-18 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और खेल मंत्री विजय गोयल, ओलंपियन राठौर के कार्यकाल में लागू किया गया। खेलों इंडिया कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य भारत में खेलों को लोकप्रिय बनाना भारत के लुप्तप्राय खेलों को नया जीवन देना तथा जमीनी स्तर से प्रतिभाशाली खिलाडिय़ों को चुनकर उन्हें प्रशिक्षित करना है। ऐसे खिलाडिय़ों के पढ़ाई, आवास, भोजन, खेल सामग्री के साथ ही साथ स्पर्धा की तैयारी के लिए देश-विदेश में प्रशिक्षित करना है। खेलो इंडिया मुकाबले में अब 17 वर्ष, 21 वर्ष से कम आयु के खिलाडिय़ों को अवसर दिया जाता है। इसमें ग्रीष्म, शीतकालीन खेलों को प्राथमिकता दी जाती है और प्रत्येक वर्ष विभिन्न खेलों के सर्वश्रेष्ठ 1000 खिलाडिय़ों में से हर एक आठ वर्ष तक 5 लाख रुपये सालाना अपने-अपने खेलों की तैयारी प्रशिक्षण के लिए दिया जाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2014 से 2019 तक के पहले कार्यकाल में जब इस तरह की खेल योजना की शुरुवात हुई तो लगा कि खेल प्रतिभाओं को पर लग गये हैं और सच्चाई सामने है। खेलो इंडिया कार्यक्रम ने भारत में खेल गतिविधियों को नई दिशा दे दी है। 2013-14 के मुकाबले 2023-24 में केंद्र सरकार का सिर्फ खेल बजट करीब 700 करोड़ रुपए से बढ़कर 2300 करोड़ याने तीन गुना से अधिक हो चुका है। केंद्र सरकार के इस तरह के सकारात्मक कदम पर शंका करने वालों के मुंह पर ताले लग गये हैं। 2017-18 के बाद से खेलो इंडिया यूथ गेम्स का आयोजन अब तक 2019, 2020, 2021, 2023 में हमारे देश के सम्पन्न हो चका है। अब 2024 में तमिलनाडु में यह आयोजित है। हमें उम्मीद है इस तरह के खेल आयोजन से हमारे उदयीमान खिलाडिय़ों के लिए 2024 के पेरिस, 2028 के लास एंजिल्स, 2032 के ब्रिसबेन में होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए मार्ग प्रशस्त हो रहा है साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का 2036 के ओलंपिक खेलों के गुजरात में कराये जाने के इरादे को भी लगातार मजबूती मिल रही है।

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