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छत्तीसगढ़

देश के छोटे राज्यों में छत्तीसगढ़ का बजट सबसे बड़ा

1.30 लाख करोड़ का बजट वर्ष 2025-26 में अनुमानित, रेवडिय़ां बांटने से विकास हो रहा प्रभावित

रायपुर। देश में छोटे राज्यों उत्तरांचल, झारखंड, तेलंगाना से बड़ा बजट छत्तीसगढ़ राज्य का होगा। वर्ष 2025-26 का बजट 1.30 लाख करोड़ का अनुमानित है। राज्य में जीएसटी लागू होनेे के कारण नया कर प्रस्तावित नहीं होगा। राज्य का पहला बजट मात्र 25,000 करोड़ का था। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के पश्चात वर्ष 2015 तक कोई कर्ज नहीं था। राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष एनडी तिवारी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय मनमोहन सिंह के साथ मिलकर छत्तीसगढ़ की कई योजनाओं को योजना आयोग से स्वीकृति दिलाई थी। जिसमें नक्सलवाद से निपटने, वनोपज का संग्रहण, उपयोग, खनिज संसाधनों का व्यापारिक उपयोग सहित कई योजनाएं शामिल थीं। योजना आयोग ने छग शासन को नई राजधानी परियोजना सहित अन्य कार्यों के लिए एक बड़ी राशि प्रदान की जिसके कारण छत्तीसगढ़ राज्य में मंत्रालय, सचिवालय, पुल-पुलिया निर्माण एवं ओव्हर ब्रिज का निर्माण बड़ी संख्या में हुआ। परिणाम स्वरूप बजट का आकार प्रतिवर्ष बढ़ता चला गया। तत्कालीन वित्त सचिव डीएस मिश्रा का मानना था कि बजट का आकार बढ़ाने से केंद्र से अनेक योजनाएं प्राप्त होगी। 25 हजार करोड़ से यह बजट 50 हजार करोड़ हुआ फिर बढ़ते गया। राज्य में जीएसटी नहीं लागू होने पर वाणिज्यिक कर से शासन की आय 30 हजार करोड़ थी। गैर स्रोतों जैसे तेंदूपत्ता एवं खनिज से आय चार हजार करोड़ थी। वहीं भिलाई इस्पात संयंत्र और कोरबा से भी बड़ी मात्रा में राजस्व प्राप्त होता था। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के निर्देश के अनुसार यदि वित्तीय वर्ष में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के मापदण्डों का पालन नहीं किया गया तो राज्य को डिफाल्टर घोषित कर दिया जाता था। जिससे राज्य के वित्तीय साधनों एवं संसाधनों में कटौती कर दी जाती थी। जिसके चलते कई राज्य बीमारू राज्य घोषित कर दिए जाते थे।
केंद्र के अनुदान से बढ़ा आकार
केंद्र शासन द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य को करीब 55 लाख रुपये का बजट अनुदान दिया जाता है। इसके चलते केंद्र परवर्तित योजनाएं संचालित हो रही है। इसके अंतर्गत नगरीय निकाय में जेएनआरयूएम, गरीबी अपशमन योजना, भागीरथी जल योजना, तथा अन्य योजनाएं चल रही है। पंचायत विभाग में प्रधानमंत्री सड़क योजना, आवास योजना, नवा बिहान एवं चिकित्सा, शिक्षा में प्रधानमंत्री केयर एवं अंधत्व निवारण तथा फायलेरिया से मुक्ति के लिए योजनाएं संचालित हो रही है। एड्स कंट्रोल के लिए भी अनुदान दिया जाता है। महिला बाल विकास तथा उद्योग, शिक्षा विभाग में मिड-डे मील योजना, पीएमश्री केयर स्कूल, अनुसूचित जाति एवं जनजाति विभाग में पोटा केबिन एवं आदिवासियों को स्कॉलरशिप की योजनाएं संचालित की जा रही है। नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए जिलों को विशेष दर्जा दिया गया है एवं आधुनिक उपकरण खरीदने के लिए अनुदान दिया जाता है।
जीएसटी से हुई आय प्रभावित
राज्य में भारत सरकार द्वारा जीएसटी लागू किए जाने के कारण आय प्रभावित हुई है। केंद्र ने इसकी क्षतिपूर्ति के लिए एक राशि देने का वायदा किया था। राज्य में तेंदूपत्ता एवं गैरपरंपरागत खनिज आय के स्रोत कम होते जा रहे हैं। जबकि सरकार रॉयल्टी बढ़ाने की मांग कर रही है। आबकारी में पूरे देश में छत्तीसगढ़ दूसरे स्थान पर था। राज्य में इससे करीब 11 हजार करोड़ की आय होती थी। अब शासकीयकरण होने के कारण मात्र 6 हजार करोड़ की आय होती है। तेंदूपत्ता से 1600 करोड़ मिलता था। एमआरपी बढ़ाने पर अब मात्र 800 करोड़ रुपये की आय हो रही है। राज्य का अनुमानित बजट डेढ़ लाख करोड़ का अनुमानित है। केंद्र से 55 लाख करोड़ मिलेगा। राज्य में धान खरीदी तथा महतारी वंदन योजना में एक बड़ी राशि खर्च हो जाती है जिसके चलते कल्याणकारी एवं विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। केंद्र में एफआरबीएम नई नीति बनाई गई है जिसके तहत कुल जीडीपी का तीन प्रतिशत लोन लिया जा सकता है। छत्तीसगढ़ सरकार फिलहाल लोन लेकर भी ही काम चला रही है।

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