छत्तीसगढ़

तमिल समाज के लोग अयप्पा भगवान की प्रतिदिन कर रहे पूजा अर्चना

दंतेवाड़ा । विष्णु के कलिग अवतार भगवान अयप्पा देव के भक्त देश दुनिया में फैले हुए हैं। दक्षिण बस्तर जैसे आदिवासी सुदुर बाहुल क्षेत्र में भी अब धीरे धीरे अयप्पा भगवान को मानने वाले भक्तों की तादात बढऩे लगी है। यहां रह रहे तमिल समाज के लोग अयप्पा देव के मंडला पूजा के लिए 41 दिनों का कठिन व्रत रखें हैं और भगवान अयप्पा के प्रति कृतज्ञता जताते हुए सुबह शाम उनकी पूजा पाठ कर रहे हैं इस दौरान सभी व्रतधारी काले कपड़े पहनते हैं और गले में रूद्राक्ष या फिर चंदन की माला धारण कर माथे पर चंदन का टीका लगाते हैं।
गौरतलब है कि दक्षिण भारत के केरल में भगवान अयप्पा स्वामी का सबरीमाला मंदिर है। ये प्राचीन मंदिर एक प्रसिद्ध हिन्दु तिर्थ स्थल भी है। अयप्पा भगवान के दर्शन के लिए यहां हर साल 4 से 5 करोड लोग आते हैं। अयप्पा देव को मानने एवं पूजने वालों की संख्या देश भर में करोडों में है। ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त अयप्पा स्वामी का व्रत रखता है सच्चे मन से उनकी आराधना करता है। नियमों का कड़ाई से पालन करता है और उनके दर्शन करता है उनकी मनोकामना अयप्पा स्वामी पूर्ण करते हैं। नगर के वार्ड क्रमांक 5 में तमिल राज्य से आकर दशकों से बसा परिवार भी इस साल अयप्पा स्वामी की कठिन व्रत रख रहा है और सभी व्रतधारी सुबह शाम एक जगह एकत्रीकरण होकर अयप्पा देव की नियमपूर्वक पूजा पाठ कर रहे हंै। व्रतधारी पी.कुमार ने बताया कि हम सब एक समाज के लोग अयप्पा स्वामी की मंडला पूजा के लिए इस साल व्रत रखे है बीते 17 नवंबर से हम सभी 17 लोग काले कपडे धारण कर पूरी श्रद्धा व आस्था के साथ अयप्पा स्वामी की पूजा अर्चना कर रहे हैं। इस पूजा मे एक टाइम ही भोजन करना होता है और स्वच्छता का विशेष ख्याल रखना होता है। पी कुमार ने बताया कि अयप्पा स्वामी की पूजा से शनि दोष भी कटता है। सभी व्रतधारी पूरे 41 दिनों तक जमीन पर सोते हैं। हम सबकी अपनी अलग अलग मनोकामनाएं है और हमें पूर्ण विश्वास है कि भगवान अयप्पाा स्वामी हमारी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण करेंगे। गुरू स्वामी, साई राम, सक्कारे, कार्तिक, चिन्ना पोनू, कुप्पाई, अंजमनि, अभिषेक, अविनाश, सोनू, कृष्णमूर्ति, मुरूगश, दिव्यांशी समेत अन्य श्रद्धालु भगवान अयप्पा स्वामी के मंदिर सबरीमाला के लिए इसी माह के 20 तारीख को रवाना होंगे।

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