छत्तीसगढ़ का टूटा सपना, मेजबानी छीनी, सब स्तब्ध

कोविड-19 महामारी से उबरकर खेलों की दुनिया में विभिन्न प्रतियोगिताओं के आयोजन का दौर जोर शोर से चल रहा है। विश्व कप हाकी (महिला) क्रिकेट श्रृंखला, राष्ट्रमण्डल खेलों आदि गतिविधियों की वजह से भारत के खेल परिदृश्य में हुए उठापटक की ओर बहुत कम लोगों का ध्यान गया।
सबसे बड़ा उलटफेर तब हुआ जब भारतीय ओलंपिक संघ ने 36वें राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी गोवा से वापस लेते हुए गुजरात ओलंपिक संघ को सौंप दिया। लगता है भारतीय ओलंपिक संघ के इस निर्णय का सभी राज्य संघों ने समर्थन किया क्योंकि किसी ने भी भाओसं के इस अप्रत्याशित निर्णय का विरोध नहीं किया। सबसे उल्लेखनीय तथ्य यह है कि 36वें खेलों के लिए पूर्व में घोषित आयोजक गोवा राज्य ओलंपिक संघ ने कोई आपत्ति नहीं की।
स्पष्ट है कि राष्ट्रीय खेलों के आयोजन में इस तरह का कदम पहली बार उठाया गया है। इसके लिए गोवा की सरकार और ओलंपिक संघ स्वयं जिम्मेदार है। गोवा को 36वें राष्ट्रीय खेलों के लिए 2013 में ही चुन लिया गया था 2011 में झारखंड में 34वें खेलों के पश्चात ही 35वें राष्ट्रीय खेलों के लिए केरला, 36वें के लिए गोवा और 37वें के लिए छत्तीसगढ़ को आयोजक स्थल घोषित किया जा चुका था। 2015 में केरला में इन खेलों का 35वां संस्कारण पूरी सफलता से सम्पन्न हुआ था। इस तरह 2011 से लेकर 2022 तक गोवा सरकार व गोवा राज्य ओलंपिक संघ को इन खेलों को सम्पन्न कराने के लिए भरपूर समय था परंतु वहां आयोजन को लेकर टालमटोल कभी विधानसभा, कभी लोकसभा चुनाव, कभी तैयारी का अभाव, कभी कोविड-19 महामारी का प्रकोप बताकर चलता रहा। 1924 में जब से इन खेलों की शुरुआत हुई तो प्रत्येक दो वर्ष में यह बहुखेल चैंपियनशिप सम्पन्न होती थी 1969 के आते-आते 2022 तक राष्ट्रीय खेलों का आयोजन अनियमित हो गया। एक समय था जबखिलाड़ियों के भविष्य को देखते हुए राष्ट्रीय खेल उनके खेल जीवन के लिए मील का पत्थर हुआ करता था क्योंकि तब अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए राष्ट्रीय खेलों में प्रदर्शन को बहुत महत्व दिया जाता था। गोवा सरकार और गोवा राज्य ओलंपिक संघ की चूक की वजह से कई खिलाड़ी अधिक उम्र होने की वजह से खेल मैदान से बाहर हो गये। 2015 से 2022 सात साल के अंतराल में कई प्रतिभागी विभिन्न खेल मुकाबलों में बने रहने के लिए निंरतर अभ्यास करते रहे उन्होंने और उनके अभिभावक तथा प्रशिक्षकों ने उनके लिए अपना तन मन धन लगाया लेकिन सब कुछ बेकार चला यगा। अत: गोवा से 36वें राष्ट्रीय खेलों को गुजरात में सम्पन्न कराने का निर्णय उचित ही लगता है। क्योंकि वहां सिर्फ चार माह के अंदर यह खेल महोत्सव सम्पन्न होने जा रहा है। इस तरह के निर्णय के पश्चात अब भारतीय ओलंपिक संघ ने 37वें राष्ट्रीय खेलों का आयोजन 2023 में गोवा में करवाने का निश्चय किया है। इसका सीधा असर छत्तीसगढ़ को हुआ है। यहां पर 2011 से इन खेलों के आयोजन की चर्चा चल रही थी जो कि 11 वर्षों बाद भी फलीभूत नहीं हो सकी है ऊपर से छत्तीसगढ़ को 37वें राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी से वंचित कर दिया गया है। छत्तीसगढ़ के खेल प्रेमियों, खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों आदि को इससे बहुत आघात पहुंचा है।
हमारे प्रदेश की सरकार और छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ को उपरोक्त घटना से सतर्क होना चाहिए और उचित मंच से पत्र व्यवहार करके पता लगाना चाहिए कि क्या 38वें राष्ट्रीय खेलों को सम्पन्न कराने की जिम्मेदारी उन्हें दे दी गई है। अगर ऐसा है तो फिर आयोजन की तैयार उच्च स्तर पर की जानी चाहिए ताकि गोवा जैसी घटना की पुनरावृत्ति न हो सके साथ ही साथ छत्तीसगढ़ के प्रतिभागियों को समय रहते अपना प्रदर्शन करने का अवसर मिल सके इस दिशा में छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ की सक्रियता हर हाल में आवश्यक है।

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