बने रहेंगे भारत के युवाओं के प्ररेणास्रोत

विश्व एथलेटिक्स प्रतियोगिता: 2022- नीरज चोपड़ा ने बनाया नया कीर्तिमान, अब महान खिलाड़ी की श्रेणी में
जसवंत क्लाडियस,तरुण छत्तीसगढ़ संवाददाता
खेलकूद में सफलता के अनेक कारण होते हैं। बाल्यकाल में जिस खेल में आगे बढ़ने की चाहत होती है उसके अनुरूप परिश्रम व कोशिश करके लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। इसे नीरज चोपड़ा ने साबित किया है। उनक असाधारण उपलब्धि को देखते हुए सरकार ने उन्हें पद्मश्री, परमविशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया है। फिलहाल वे भारतीय सेना में सूबेदार के पद पर पदस्थ हैं। हमारे देश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आज भी चाहे ओलंपिक खेल हो या नान ओलंपिक खेल भारत में उदयीमान प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। कहते हैं नजर चूकी और दुर्घटना घटी ठीक वैसी ही बात हम खेलकूद के लिए कह सकते हैं। खेल में भाग लेने के लिए चयन के दौरान उपयुक्त खिलाड़ी की पहचान में अगर चूक हुई तो फिर असफलता हाथ लगती है। जैसे पानी से डरने वाले बच्चे को तैराकी के लिए चुनना बड़ी गलती है। भारत के महान एथलीट भालाफेंक के ओलंपिक चैंपियन तथा विश्व एथलेटिक्स में रजत पदक विजेता नीरज चोपड़ा ने बचपन से ही अपना लक्ष्य तय कर लिया था। एथलेटिक्स खेल के अंतर्गत भालाफेेंक में सफलता ताकतवर होने की अपेक्षा भाले का एरिना मेें दौड़ते हुए फाउल निशान से पहले पूरी ताकत के साथ खुले क्षेत्र में फेंकना महत्वपूर्ण होता है। इस दृष्टि से नीरज चोपड़ा की अब तक की सफलता में इस तकनीक का प्रमुख योगदान है। हरियाणा राज्य के पानीपत के निकट खोड़ा गांव में एक किसान परिवार में 24 दिसम्बर 1997 को जन्म लेने वाले नीरज चोपड़ा ने सिर्फ 11 वर्ष की उम्र से भाला फेंक को अपनाने का निश्चय कर लिया था। 2010 में पानीपत के स्थानीय खेल प्राधिकरण केन्द्र में भालाफेंक के खिलाड़ी जयवीर चौधरी से उनकी मुलाकात हुई। उस समय बिना किसी प्रशिक्षण व तकनीकी जानकारी के नीरज 40 मीटर भाला फेंककर सबो आश्चर्यचकित कर दिया। जब बच्चों के खेलने-कूदने का समय हेाता है तब सिर्फ 13 वर्ष की उम्र में पंचकुला स्थित ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स काम्पलेक्स में इस खेल के प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए प्रवेश लिया। फिर 27 अक्टूबर 2012 को नये राष्ट्रीय कीर्तिमान 68.40 मीटर की दूरी तक भाला फेंककर स्पर्ण पदक जीता। 2014 में उन्होंने बैंकाक के यूथ ओलंपिक में रजत पदक के साथ पहला अंतर्राष्ट्रीय सफलता हासिल किया। खेल के प्रति समर्पण और अनुशासन व मेहनत के कारण उनके जीवन में कामयाबी की कतार लग गई। 2014 में नये रिकार्ड के साथ वे जीते। 2015 में उन्होंने पुराने विश्व कीर्तिमान को ध्वस्त करते हुए 81.04 मीटर भाला फेंका।
2016 में पोलैंड में आयोजित आईएएएफ अंडर 20 स्पर्धा में नीरज ने 86.48 मीटर भाला फेंककर भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता और उसे बाद कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा इस इवेंट में आगे बढ़ने के लिए वे लगातार ईमानदारी से अभ्यास करते रहे जिसका परिणाम आया कि वे प्रत्येक टूर्नामेंट में नई उपलब्धि हासिल करते जा रहे हैं। 2016 के दक्षिण एशियाई खेलों में 82.23 मीटर भाला फेंका लेकिन ओलंपिक खेलों के लिए आवश्यक 83 मीटर की दूर तय नहीं कर सके। 2016 के रियो द जेनेरियो ओलंपिक खेलों के लिए योग्यता हासिल नहीं करने को उन्होंने चुनौती के रूप में लिया। एरिना में निरंतर पसीना बहाते रहे। इसका प्रमाण है कि 2017 में एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 85.23 मीटर के साथ नीरज ने स्वर्ण पदक जीता। फिर 2018 के राष्ट्रमण्डल खेलों में भाला को 86.47 मीटर तक फेंककर स्वर्ण पदक जीता फिर 2018 में दोहा डायमंड लीग में 87.43 मीटर, 2018 में एशियन गेम्स में 88.06 मीटर। 2021 ओलंपिक खेलों में 87.58 मी. भाला फेंककर स्वर्ण जीता। ऐसी उपलब्धि हासिल करने वाले पहले एथलीट बने। डायमंड लीग में 89.94 मी. भाला के द्वारा अब तक सबसे दूरी तय करने में कामयाब हुए। अभी हाल ही में विश्व एथलेटिक्स स्पर्धा में 88.13 मीटर भाला फेंककर सिल्वर मेडल जीता ऐसी उपलब्धि हासिल करने वाले वे पहले भातरीय हैं। इस तरह स्पष्ट है कि नीरज आज हमारे देश के युवाओं के प्रेरणास्रोत बन चुके हैं। नीरज को सफलता को सिलसिलेवार प्रकाशित-प्रसारित प्रोत्साहित करने से युवाओं को प्रोत्साहन मिलेगा।

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