आदिवासी सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का कार्य कर रही छत्तीसगढ़ सरकार

रायपुर। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने जशपुर के सरना एथेनिक रिसोर्ट में आयोजित आदिवासी समाज के सम्मेलन में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने सम्मलेन को सम्बोधित करते हुए कहा कि हमारी सरकार आदिवासी समाज की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का कार्य कर रही है। रायपुर में तीन दिवसीय आदिवासी सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें देश-विदेश के कलाकारों ने अपनी सांस्कृतिक कला की झलक दिखाई गई। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि भेंट-मुलाकात के दौरान आदिवासी समाज को संरक्षित करने के लिए देव स्थल, देवगुड़ी निर्माण कार्य की स्वीकृति दी जा रही है। सम्मेलन में आदिवासी समाज द्वारा मुख्यमंत्री को पारम्परिक शॉल और तलवार-ढाल भेंटकर स्वागत किया।मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों को जाति प्रमाण पत्र बनाने में आ रही समस्या को दूर करने के लिए अनुसूचित जनजाति विभाग को अध्ययन कर इसकी रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम स्कूल में दाखिले को लेकर पालकों और बच्चों की मांग को देखते हुए इन स्कूलों की संख्या बढ़ाई जा रही है। इस साल 76 और नए स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय शुरू किए जा रहे हैं। राज्य में स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी स्कूलों की संख्या बढ़कर 247 हो गई है। ज्यादा से ज्यादा बच्चों को इन स्कूलों में दाखिला मिले इसको लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे है। प्रत्येक कक्षा में सीटों की संख्या 40 से बढ़ाकर अब 50 कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोनाकाल में लोगों को राज्य में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करायी गई। हमारी सरकार स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में बेहतर कार्य कर रही और उसका लाभ लोगों को मिल रहा है। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत इनपुट सब्सिडी दी जा रही है। इस योजना में खरीफ की सभी फसलों एवं उद्यानिकी फसलों को शामिल किया गया है। किसानों से समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी तत्काल भुगतान की व्यवस्था की गई है।
कोदो-कुटकी, रागी की खरीदी भी समर्थन मूल्य पर की जा रही है। दलहन की भी खरीदी राज्य में समर्थन मूल्य पर की जाएगी। उन्होंने कहा कि जशपुर जिले का मौसम खेती-किसानी के लिए अनुकूल है। यहां मिर्च, टाऊ, काजू, चाय, लीची और नाशपाती की अच्छी खेती होती है। गांव को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए गौठान को औद्योगिक पार्क के रुप में विकसित किया जा रहा है। गौठान में समूह की महिलाएं विभिन्न आयमूलक गतिविधियों से जुड़कर आर्थिक लाभ उठा रही हैं।

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