ब्रांडेड कंपनी की दवाईयों और जन औषधि केन्द्रों की दवाईयों की कीमतों में जमीन आसमान का फर्क

रायपुर। केन्द्र सरकार द्वारा जनऔषधि केन्द्रों के माध्यम से बड़ी फार्मासियुटिकल्स कंपनियों द्वारा निर्मित विभिन्न जीवन रक्षक दवाईयां जो एक ही फार्मूले से बनाई गई है। उनके मूल्यों में करों का हवाला देकर जमकर मरीजों से लूटपाट की जा रही है। छत्तीसगढ़ पेंशनर्स फेडरेशन के राज्य अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने जारी विज्ञप्ति में खुलासा करते हुए बताया कि एक समान फार्मूले से बनी उक्त दवाईयां जनलऔषधि केन्द्रों में न्यूनतम मूल्यों पर बेची जा रही है। देश में जिस तरह से मधुमेह और उच्च रक्तचाप सहित अनेक बीमारियों से ग्रस्त मरीजों की संख्या देश में लगातार इजाफा होता जा रहा है। उक्त स्थिति में अनेक मेडिफर्मा कंपनियां दोनों हाथों से मरीजों को लूट रही है। उन्होंने दवाओं में हो रही लूटपाट उद्धवरण देते हुए बताया कि ब्लडप्रेशर की एक दवा है एमलोप्रेस-ऐटी। इसका बाजार मूल्य 82.30 प्रति दस टेबलेट है। अर्थात 8.25 प्रति टेबलेट। इसके विकल्प के रूप में उपलब्ध दवा एमचेक-ऐटी का मूल्य 7.70 रू प्रति टेबलेट है। प्रिमोडिल-ऐटी का मूल्य 6.85 रू प्रति टेबलेट है और एमलिप-ऐटी का मूल्य 6.60 रू प्रति टेबलेट है। लेकिन आप यह जानकर चौंक जाएंगे, स्तब्ध रह जाएंगे कि प्रधानमंत्री मोदी ने 5 वर्ष पूर्व यह व्यवस्था करी कि आम लोगों को यही दवा केवल 35 पैसे प्रति टेबलेट की दर से उपलब्ध हो। आज देश में खुल चुके 7668 जनऔषधि केन्द्रों में जेनरिक नाम से उपलब्ध इस दवा की दस टेबलेट की स्ट्रिप का मूल्य केवल 3.50 रू है। यह अकेली ऐसी दवा नहीं है। ऐसी 600 से अधिक दवाएं बाज़ार में ब्रैंडेड नाम से जिस मूल्य से मिलती हैं उनसे 5 से 15 गुना कम दाम पर जनऔषधि केन्द्रों में उपलब्ध हैं। ऑर्बिटेल-एच नाम की ब्लडप्रेशर की जो दवा मैं स्वयं खाता हूं, उसका बाजार मूल्य 11.50 रु प्रति टेबलेट है। लेकिन जनऔषधि केन्द्रों पर यही दवा केवल 1.50 रुपये प्रति टेबलेट के दाम पर उपलब्ध है। इसी प्रकार शुगर की बहुत मशहूर दवा ग्लिमिपिराइड 2 एमजी जो बाज़ार में अलग अलग ब्रैंड नाम से 25 से 30 रूपये प्रति स्ट्रिप की दर से बिकती है वही दवा जनऔषधि केन्द्रों में 4.02 रूपये प्रति स्ट्रिप की दर से मिलती है। सिर्फ दवाएं ही नहीं बल्कि महिलाओं बच्चों के सैनिटरी नैपकिन/पैड्स से लेकर 100 से अधिक सर्जिकल आइटम्स भी इन जनऔषधि केन्द्रों पर आपको कई गुना कम दामों पर मिल जाएंगे। इसके लिए केवल इतनी मेहनत आपको करनी पड़ेगी कि जो ब्रैंडेड दवा आप खा रहे हैं उसके सॉल्ट का नाम आप ज्ञात कर लें, जो कि हर दवा के पत्ते पर लिखा रहता है। जैसे कि कॉलपोल या क्रोसिन नाम की बहुत मशहूर ब्रैंडेड दवा के सॉल्ट का नाम पैरासिटामोल है। जनऔषधि केन्द्र की वेबसाइट से दवाओं की पूरी सूची डाऊनलोड कर के अपनी दवा के सॉल्ट का कोड अगर एकबार आप ज्ञात कर लेंगे तो आपको और अधिक आसानी होगी। जनऔषधि केन्द्र खोलने की यह योजना सन 2008 में यूपीए सरकार ने शुरू की थी लेकिन 6 साल बाद मार्च 2014 तक पूरे देश में मात्र 80 जनऔषधि केन्द्र ही खुले थे। लेकिन सितंबर 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने इस योजना को पुनर्जीवित किया और आज साढ़े 5 साल में देश में 7668 जनऔषधि केन्द्र खुल चुके हैं। केवल एक यही तथ्य सब कुछ कह देता है। प्रधानमंत्री मोदी के इस कदम के बाद दवा इंडिया नाम की एक निजी क्षेत्र की कम्पनी भी जेनरिक दवाओं के व्यापार में पूरी तैयारी के साथ आ चुकी है। देश में इसके 550 से अधिक मेडिकल स्टोर खुल चुके हैं। जनऔषधि केन्द्रों से 10-15 प्रतिशत अधिक दामों पर यह जेनरिक दवाओं को ऑनलाइन बिक्री के द्वारा आपके घर तक भी पहुंचा रही है।

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